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NAULI KRIYA नौली क्रिया

                                    Nauli Kriya                                       नौली क्रिया                                                       By साधक विपिन योगाचार्य  अनुक्रम 15.5-  नौलि (लौलिकी) षटकर्मो में शुद्धिकरण की चौथी प्रक्रिया है। पिछली इकार्इ में धौति के प्रकारों में आपने अग्निसार क्रिया का अध्ययन किया। नौलि क्रिया अग्निसार का ही एक प्रकार है या यूँ कहे कि नौलि क्रिया अग्निसार अन्त: धौति की उच्च अभ्यास है। जठराग्नि को बढ़ाने वाली इस क्रिया में उदरगत मॉसपेशियों की मालिश होती है या पेट की समस्त मांसपेशियों की क्रियाशीलता त्वरित गति से बढ़ती है। महर्षि घेरण्ड ने नौलि की क्रियाविधि व लाभों को समझाते हुए कहा है। अमन्दहवेगेन तुन्द्...